तमिलनाडु के तटीय क्षेत्र में चक्रवात गाजा का प्रभाव हर तरफ देखने को मिल रहा है। इस चक्रवात की वजह से पेड़ उखड़ गए हैं, घरों की छतें उड़ गयी हैं। जिससे राज्य  के निवासियों के बीच निराशा की भावना है। हालांकि रेस्क्यू टीम हर समय लोगों की सुरक्षा के लिए और उन्हें वहां से दूसरी जगह पहुंचाने का निरंतर प्रयास कर रही है। 

ऐसी अनिश्चित परिस्थितीयों में नौकरशाहों की भागीदारी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। त्वरित निर्णय लेने के साथ-साथ समय पर कार्यवाही सुनिश्चित करने की उनकी विशेषज्ञता भी सामने आती है। 

ऐसे ही आइएएस अधिकारी जॉनी टॉम वर्गीस जिन्होंने नागपट्टिनम में गाजा के क्रोध से दुर्घटनाग्रस्त मछुआरों को राहत शिविरों तक पहुंचने के लिए राहत टीम का नेतृत्व किया। वह एक ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने वास्तव में इस त्रासदी में सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। 

वर्गीस राज्य मस्तपालन विभाग के अतिरिक्त निदेशक हैं। और इन्हें नागपट्टियम का नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। पिछले एक हफ्ते में उन्होंने गाजा प्रभावित गाँवों में कई बार दौरे किये हैं। 

कुछ महीने पहले केरल की 100 वर्षो की भीषण बाढ़ की वजह से पूरा केरल तबाह हो गया था। जिसके प्रभाव से लोग अभी तक उभर नहीं पाए हैं। जिस तरह इस त्रासदी में सशत्र बलों के साथ वहाँ के मछुआरे और आम नागरिक लोगों को बचाने के लिए शामिल हुए निसंदेह वह सराहनीय है। 

वहीं केरल बाढ़ में टीवी अनुपमा, के वासुकि, कृष्णा तेजा मायालावारापु , कन्नन गोपीनाथन, प्रशांत नायर, और एमजी राजनीक्यम जैसे  गतिमान आइएएस अधिकारियों के योगदान को नहीं भूलना चाहिए। जिन्होंने कर्तव्य से परे अपने कार्य को बखूबी अंजाम दिया। वास्तव में इन लोगों  का उदहारण देने का अर्थ हैं कि आवश्यकता के समय में इन अधिकारियों ने लोगों की मदद की। 

हम उम्मीद करते हैं कि तमिलनाडु भी गाजा चक्रवात के प्रभाव से जल्द ही उभर पाएगा। और जॉनी टॉम वर्गीस जैसे समर्पित अधिकारियों की भागीदारी से निश्चित ही लोग कष्ट मुक्त हो जाएंगे। 

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