ट्रेन में आरक्षित सीट की कमी के कारण एक दुखद घटना हुई। भारतीय रेलवे में आपातकालीन कोटे की सीटों के बारे में कम जागरूकता की वजह से एक साल की लड़की मरियम को अपनी जान गंवानी पड़ी। मरियम जो हृदय रोग से पीड़ित थी अपने माता-पिता के साथ तत्काल इलाज के लिए कुन्नूर से तिरुवनंतपुरम जाने वाली मावेली एक्सप्रेस से यात्रा कर रही थी। 

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दरअसल मरियम के माता-पिता शमीम और सुरैया ने आरक्षित बर्थ के लिए टीटीई से गुहार लगायी थी। लेकिन ट्रेन पूरी तरह से बुक थी इसलिए टीटीई ने सामान्य डिब्बे में यात्रा करने का निर्देश दिया। लेकिन मरियम की तबियत बिगड़ने के बावजूद वह उन्हें आरक्षित बर्थ देने को तैयार नहीं थे।

उन्होंने रेलवे के अधिकारियों से भी गुहार लगायी लेकिन वह नहीं माने आखिरकार मजबूरन शमीम मरियम को लेडीज डिब्बे में ले गयी जहाँ कम भीड़ थी, फिर भी मरियम को बचाया नहीं जा सका। 

नियम के अनुसार जो यात्री इलाज के लिए ट्रेन से यात्रा कर रहे हों वह आपात्कालीन कोटा प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे मामलों में आरक्षण क्लर्क को डिवीज़न कार्यालय तक जाने की आवश्यकता होती है। और आरक्षण चार्ट तैयार होने से पहले आपातकालीन कोटा के तहत आवेदन जमा करना होता हैं। 

ऐसी घटनाओं की पुनारावृत्ति न हो इसलिए रेलवे द्वारा प्रदान की गईं आपातकालीन सुविधाओं की जानकारी रखना आवश्यक है। आइये जानते हैं ऐसी स्थिति में रेलवे द्वारा यात्रियों को कौन-सी सुविधाएं मिलती हैं। 

1. अगर कोई मरीज दिल की सर्जरी के लिए यात्रा कर रहा है तो मरीज और उसके साथी को किराये में 75 प्रतिशत की कमी का लाभ मिलता हैं। साथ ही कैंसर रोगी और उसके सहायक के लिए आरक्षण मुफ्त में किया जा सकता हैं। इसके लिए मरीजों के पास डॉक्टर का प्रमाणपत्र होना जरूरी है। 

2. हालाँकि ऐसा कोई जनादेश नहीं है कि टीटीई किसी मरीज को आपातकालीन यात्रा के लिए आरक्षित सीट दे। लेकिन मानवीय आधार पर वह ऐसा कर सकता है। 

3. इलाज के लिए जा रहे मरीजों को यात्रा के दौरान डॉक्टर की जरुरत पड़ सकती है इसलिए आवश्यक है कि वह आरक्षण चार्ट में डॉक्टर की तलाश करे और आपात स्थिति में उसकी सेवा ले। 

4. यात्रा के दौरान तबियत ज्यादा बिगड़ने की स्थिति में मरीज की स्थिति का ब्यौरा, टीटीई या गार्ड अपने नियंत्रण कक्ष को देते हैं और अगले स्टेशन में तत्काल उपचार के लिए एम्बुलेंस बुलाकर उन्हें सूचित करने  भी प्रावधान है। 

5. आसपास के अस्पतालों का विवरण सभी स्टेशनों पर प्रदर्शित होता है जिस कारन मरीज़ को तुरंत इलाज के लिए यहाँ-वहां भटकना न पड़े। 

6. यात्रा करते समय आपातकालीन देखभाल के तहत यात्री को सहायता के लिए टोल फ्री नम्बर 138 और 182 पर फोन करके अधिकारियों तक पहुंचने की भी सुविधा है। 

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