असम जिले के नागाओं गांव में बेहद गरीब परिवार में जन्मी हिमादास एक भारतीय धावक हैं। “ढिंग एक्सप्रेस” के नाम से विख्यात हिमा भारत की पहली ऐसी महिला धावक हैं जिन्होंने आयएएएफ़ अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीता और हाल ही में सम्पन्न हुए 18 वे एशियाई गेम्स में 400 मीटर रिले स्पर्धा में एक स्वर्ण जीता और चार गुना 400 मीटर मिश्रित स्पर्धा में रजत जीतकर देश सर गर्व से ऊँचा कर दिया।

 

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Everything played out as per script for the Indian women in the 4x400m relay on the final day of the athletics programme at the 2018 Asian Games. Hima Das, the fastest quarter-miler in the country, gave the lead on the first lap with a searing run, setting a heady tone for the whole race, which the rest did well to consolidate, leaving their opponets in a helpless wake. Clocking an impressive 3:28.72s, they ensured India won its fifth 4×400 relay gold medal at the Asian Games on the trot. For Hima, who celebrated wildly, it was her first gold medal at the Games after enduring heartbreaks in 400m and 4x400m mixed relay. On both instances she had to settle for silver. What makes the gold even more glittering is that they are a young group. Poovamma, at 28, is the oldest. Sarita Gayakwad is 24, Hima 18 and VK Vismaya 21. Both Povamma and Hima, who undoubtedly is among the most promising young athletes in the continent, had on Wednesday claimed silver in the 4x400m mixed relay as well. :-__________________ #mixedrelay #silvermedal #asiangames #asiad #himadas #womeninsports #sportswomen #womenathletes #IwillGoOut #athletes #india #indiaatasiangames Source : Indian Express

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हिमदास का कम उम्र से ही खेलों की तरफ रुझान था। बचपन में वे लड़कों के साथ फूटबाल खेला करती थीं, जिस वजह से हिमा का स्टेमिना काफी बढ़ गया था। वे दौड़ते हुए ज्यादा नहीं थकती थीं। हिमा को धावक बनाने की सलाह सबसे पहले एक स्कूल के फिजिकल एजुकेशन के शिक्षक द्वारा दी गयी जिसके बाद हिमा ने अपना ध्यान रेसिंग पर लगाना शुरू किया।

 

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Cooolllll run Mon jai

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लेकिन सुविधाओं के अभाव की वजह से हिमा को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। शुरुआती दिनों में दौड़ने के लिए रेसिंग ट्रैक न होने की वजह से हिमा को फुटबॉल के गंदे मैदान पर ही प्रशिक्षण लेना पड़ता था। इसके बाद हिमा ने कई तरह की दौड़ से जुड़ी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेना शुरू कर दिया।

साल 2017 में खेल और युवा कल्याण निदेशालय की ओर से आयोजित स्पर्धा में हिमा की मुलाकात कोच निपुण दास से हुई। सुविधाओं और प्रशिक्षण उपकरणों की कमी के बावजूद इस प्रतिस्पर्धा में हिमा ने 100 और 200 मीटर में पहला स्थान हासिल किया। हिमा ने सस्ते जुते पहनकर यह दौड़ लगायी थी और जिस तेजी से वे दौड़ीं उसे देखकर सब हैरान थे।

 

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The proud moment! #himadas

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हिमा की दौड़ देखकर निपुण दास ने उन्हें प्रशिक्षण देने की इच्छा जाहिर की जिसके बाद वे उन्हें गुवाहाटी ले आये। हिमा की आर्थिक परिस्थिति ठीक न होने के कारण हिमा का सारा खर्चा निपुण दास ने ही उठाया।  शुरुआत में हिमा को 200 मीटर दौड़ के लिए तैयार किया गया। लेकिन जैसे-जैसे इनका स्टेमिना बढ़ता गया उन्होंने 200 मीटर की जगह 400 मीटर के ट्रैक पर दौड़ना शुरू कर दिया।

हिमा ने बैंकांक में हुए एशियाई युथ चैंपियनशिप और उसके बाद कामनवेल्थ स्पर्धा में भी हिस्सा लिया था। जहाँ वे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकीं। इसके बाद अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए हिमा ने आयएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में 51.46 का समय लेकर स्वर्ण पदक हासिल करके इतिहास रच दिया। इससे पहले कोई भी भारतीय महिला 400 मीटर दौड़ जीतने में कामयाब नहीं हुई। इसके बाद हाल ही में संपन्न हुए 18 वे एशियाइ खेलो  में 400 मीटर रिले स्पर्धा स्वर्णिम दौड़ लगाते हुए हिमा ने सोना जीता और चार गुना 400 मीटर मिश्रित स्पर्धा में रजत जीता।

 

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हम उम्मीद करते हैं किआने वाले समय में हिमादास अपने देश के लिए कई और रिकॉर्ड बनाये और देश का नाम रोशन करें। साथ ही हिमा के संघर्ष को देखकर और भी लोग इनसे प्रेरित हों और एक अच्छे खिलाड़ी बनें।

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