दस साल पहले मुंबई में हुए 26/11 के आतंकवादी हमले ने पूरे देश को झकझोर के रख दिया था। चार दिनों तक चले इस हमले के दौरान 100 से अधिक लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इस दौरान देश ने सुरक्षा बलों और समाज के नागरिकों ने दूसरों को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डाल दी। ऐसे ही चार नायक थे जिनकी वजह से कई जानें बच गयीं। आज 26/11 की दसवीं सालगिरह पर उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। 

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वे चार नायक कोई और नहीं बल्कि मुंबई पुलिस के बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वाड के मैक्स, टाइगर, सुल्तान और सीज़र नामक श्वान थे। जिन्होंने इस हमले के दौरान कई विस्फोटकों का सूंघकर पता लगाया और अनगिनत जिंदगियों को बचाया। इन श्वानों की खास बात यह थी कि वे एक दशक से कई बम खोजी दल का हिस्सा रह चुके हैं। चारों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त भी थे। आज के दिन हम इन नायकों को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। 

2004 में पैदा हुए मैक्स को बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वाड में बहुत छोटी उम्र में ही शामिल कर लिया गया था और पुणे में एक साल के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया था।इस बहादुर कुत्ते ने 2006 में हुए 7/11 और 2011 में हुए ज़वेरी बाजार ब्लास्ट में विस्फोटक खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 26/11 के हमले के दौरान मैक्स ने 8 किलोग्राम आरडीएक्स, 25 ग्रेनेड, 4 डेटोनेटर्स, बॉल बेयरिंग और शर्पनेल जैसे विस्फोटकों का आश्चर्यजनक रूप से पता लगाया। जिसके लिए अमिताभ बच्चन ने उन्हें स्वर्ण पदक से सम्मानित किया। 

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वहीं दूसरी तरफ टाइगर और सुल्तान बचपन से दोस्त थे। और दोनों ने बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वाड(बीडीडीएस) गोरेगांव यूनिट के लिए मिलकर काम किया। और इन दोनों ने 26/11 की जांच और बम का पता लगाने में मदद की थी। हमले के बाद टाइगर को ताजमहल होटल के बाहर तैनात किया गया था। 

वहीं सबसे आखिरी श्वान सीज़र, जिसने मैक्स की तरह सीएसएमटी रेलवे स्टेशन से दो हथगोले और ताजमहल होटल से 8 किलो आरडीएक्स का पता लगाया। वह नरीमन हाउस में खोजी टीम का भी हिस्सा था। इसके अलावा यह प्यारा श्वान 2006 के ट्रेन विस्फोट और 2011 में लगातार हुए विस्फोटों के दौरान बम सर्च ऑपरेशन का हिस्सा था। सीज़र ने 2005 से 2013 तक बीडीडीएस के लिए कार्य किया। 

लेकिन 8 अप्रैल 2016 को बुढ़ापे के कारण मैक्स का निधन हो गया। अपने दोस्त की मौत से ये तीनों श्वान इतने दुखी हो गए कि छह महीने की अवधि में बाकी तीनों का भी निधन हो गया। 18 जून को 11 साल की उम्र में सुल्तान का गुर्दे की बीमारी की वजह से निधन हो गया। वहीं टाइगर ने फेफड़ो के संक्रमण की वजह से  22 जुलाई को अपनी आखिरी सांस ली। इसके बाद सीज़र अकेला पड़ गया में और 13 साल की उम्र में दिल के दौरे की वजह से उसका भी निधन हो गया। 

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इन चारों श्वान नायकों का बड़े ही सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। ये नायक इस दुनिया से चले गए लेकिन उन्होंने इतिहास में बहादुरी के लिए अपना नाम दर्ज़ कर लिया है। 26/11 की इस दसवीं सालगिरह पर आज हम इन नायकों को याद करते हैं क्योंकि उनके योगदान ने मुंबई को और अधिक रक्तपात और तबाही से बचा लिया।  

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