इंसान की सफलता के पीछे कहीं न कहीं परिजनों का हाथ होता है। हर परिस्थितियों में सहारा देने वाले उन हाथों पर लोग ध्यान भले ही न देते हों लेकिन उन्हीं की बदौलत इंसान बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल कर लेता है। रविवार को चेक रिपब्लिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले अरपिंदर सिंह के साथ भी कुछ ऐसा ही सहयोग रहा।

 

अरपिंदर की कामयाबी के पीछे उनके पिता का त्याग भी है। एनबीटी के अनुसार सेना से रिटायर अरपिंदर के पिता जगवीर सिंह ने बेटे को खिलाड़ी बनाने के लिए अपनी जमीन तक गिरवी रख दी थी। बेटे की सफलता के बाद जगवीर फूले नहीं समा रहे हैं और उन्हें अपने लिए गए फैसले पर किसी भी तरह का अफसोस नहीं है।

 

खबरों के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद जगवीर के सामने पैसों की किल्लत भी थी। बावजूद इसके, वे अपने बेटे को प्रति माह ₹20 हजार भेजते रहते क्योंकि अरपिंदर को खेलने के लिए अक्सर महीनों बाहर रहना पड़ता था। जगवीर बताते हैं, ‘मैं उधार लेकर रुपये भेजता था। ₹4 लाख का कर्ज हो गया। दो एकड़ जमीन गिरवी रखनी पड़ी।”

 

 

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खबरों के मुताबिक, “अरपिंदर सुबह उठने में बड़ी आनाकानी करता था। मुझे उसके मुंह पर पानी फेंकना पड़ता तो कभी गर्दन पकड़कर उसे उठाता। मौसम कोई भी हो, प्रैक्टिस नहीं रोकी। एक बार बारिश में दौड़ते समय वह सड़क पर पड़े बबूल के पेड़ पर गिर गया। चेहरे, गले और पैरों में बहुत चोटें आई। तब मैंने उससे कहा था कि बेटे इस चोट से घबराना मत।”

गौरतलब हो कि रविवार को एशिया पेसिफिक में अरपिंदर ने 16.59 मीटर छलांग लगाकर कांस्य पदक जीता।

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