दुनिया में कुछ एेसे लोग होते हैं जो अपनी हिम्मत आैर कामयाबी की मिसाल बन जाते हैं। एेसे ही शख्स के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्हाेंने जिंदगी में हार नहीं मानी आैर हौसलाें के दम पर क़ाबलियत हासिल की। त्रिपुरा की राजधानी अगरलता के रहने वाले काजल डे जो जन्म से दिव्यांग नहीं थे। एक हादसे में अपने दोनों हाँथ गवां बैठे। लेकिन फिर भी वे आगे बढ़े और आज वे टेबल टेनिस के कोच हैं। 

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21 मई 1991 को राजीव गाँधी की हत्या की गयी थी इसी वजह से देश-भर में माहौल गरमाया हुआ था। काजल एक नर्सिंग होम में ड्राइवर की नौकरी करता था। और वह अक्सर अपनी नौकरी से देर रात घर को लौटता था। ऐसे ही उस दिन वह काम से घर लौट रहा था तब क्रुद्ध भीड़ ने काजल पर हमला कर दिया और इस हमले में उनके दोनों हाथ जख्मी हो गए। 

इसके बाद उनके दोस्त उन्हें अस्पताल ले गए जहां उन्हें खून चढ़ाया गया और संक्रमण का इलाज किया गया। इस हादसे में उन्हें अपने दोनों हाथों को  खोना पड़ा। उनका जो नुक्सान हुआ था उसकी क्षतीपूर्ति तो नहीं हो सकती थी। लेकिन फिर भी इलाज के कुछ महीनों के बाद इसका समाधान खोजने के लिए काजल ने कोलकाता, राजस्थान और चंडीगड़ जैसे कई शहरों में कृत्रिम अंग केन्द्रों का दौरा किया। लेकिन यहाँ भी किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। 

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एक साल के बाद उन्हें पुणे के कृत्रिम अंग केंद्र के बारे में जानकारी मिली। जहां वे अपना इलाज करवाने पहुंचे। काजल को डॉक्टरों  ने  विशेष ऑपरेशन की सलाह दी और वे मान गए जिसके बाद काजल का पांच महीने 17 दिनों तक उपचार चला। ऑपरेशन सफल रहा उनके दोनों हाथों की हड्डियों त्वचा और मांसपेशियाँ धीरे-धीरे चारों ओर से बढ़ने लगीं जिससे अब उन्हें चम्मच, काँटा, मोबाइल पकड़ने में कोई दिक्कत नहीं थी। यहाँ तक कि वे टेबल टेनिस भी खेल सकते थे। 

इसके बाद टेबल टेनिस खेल की वजह से काजल की जिंदगी बदल गयी। वे अपनी कलाई पर टेबल टेनिस का बल्ला बांधकर खेलते थे। हाथ खोने के बाद करीब तीन दशक से काजल टेबल टेनिस खेल रहे हैं और बच्चो को सीखा भी रहे हैं। उनका खेल देखकर ऐसा प्रतीत होता हैं जैसे कोई आम इंसान खेल रहा हो। 

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पब्लिक वर्क्स डिपार्मेंट(पीडब्लूडी) में चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी के रूप में कार्यरत काजल ने कई अंतर कार्यालय टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और लगातार जीत हासिल की। इसके अलावा राष्ट्रीय पैरा टेबल टेनिस एसोसिएशन में उन्होंने भाग लिया था लेकिन यहाँ किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और वे शीघ्र ही इस दौर से बाहर हो गए। 

लेकिन काजल ने हार नहीं मानी। वे अपने छात्रों के माध्यम से अपने सपने को जी रहे हैं। उनके कुछ छात्र द्वैपायन दत्ता 2017 में उत्तर पूर्व टेबल टेनिस टूर्नमेंट में विजेता रह चुके हैं। इसके अलावा ओमकार देबनाथ, मौमिता साहा, श्रेयसी चक्रवर्ती जैसे अन्य छात्रों ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय टूर्नमेंट में पदक जीते हैं। 

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यहाँ तक कि काजल की बेटी कल्याणी डे भी कई नेशनल टूर्नामेंटो का हिस्सा रह चुकी हैं जहां कल्याणी ने चार रजत और कांस्य पदक जीते हैं। और साथ ही कई टूर्नामेंटो में प्रशंसा भी प्राप्त की है। 

काजल अभी त्रिपुरा में बच्चों की टेबल टेनिस सिखाते हैं। उन्हें उम्मीद हैं कि अधिक से अधिक बच्चे इस खेल को अपने करियर के रूप में चुनेंगे। काजल डे निसंदेह हमेशा उन लोगों को मार्गदर्शन देने को तैयार हैं जिन्हें इसकी आवश्यकता हैं।  

 

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