सिक्किम दर्शन को गए उन 2500 यात्रियों का न जाने क्या होता अगर भारतीय सेना समय पर नहीं पहुंचती। शायद उनमें से कई बच नहीं पाते क्योंकि ठंड ही ऐसी थी। 28 दिसंबर को सिक्किम में भारी बर्फबारी के कारण ये सभी नाथू ला और 17 मील क्षेत्र में फंस गए थे। यहाँ तक कि इनके पास संपर्क करने के लिए कोई साधन भी नहीं था।

 

ऐसे में जब इन सबने बचने की आशा छोड़ दी थी तभी भारतीय सेना की एक पलटन इनके लिए जीवन रक्षक बनकर आई।  फिर शुरू हुआ -9 डिग्री तापमान में बचाव कार्य। यात्रियों की इस टीम में बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। भारतीय सेना ने न सिर्फ इन्हें बचाया बल्कि इनके रहने, खाने-पीने सभी चीजों का इंतजाम भी किया।

जब उन्होंने देखा कि इनमें से करीब 90 लोगों की तबियत खराब है तो सेना ने तुरत एंबुलेंस मंगवाया और उन्हें अस्पताल की ओर रवाना कर दिया। भारतीय सेना ने इस बचाव कार्य की तस्वीरें अपने अधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर साझा किया है।

Hindustan Times में छपी एक खबर के अनुसार, इस बचाव कार्य का नेतृत्व कर रहे ब्रिगेडियर जे. एस. धद्वाल ने कहा, “ये सभी यात्री करीब 13000 फीट पर फंसे थे। बचाव कार्य के बाद इन्हें 9000 फीट पर स्थित भारतीय सेना के कैंप में लाया गया जहाँ इन्होंने रात बिताई।”

 

ट्विटर पर भारतीय सेना के इस साहसिक कार्य के लिए जमकर सराहना की जा रही है। उन फंसे हुए यात्रियों में से एक यात्री जिनका नाम संदीप कुलकर्णी है उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “आपका हृदय से धन्यवाद। मैं उन फंसे हुए यात्रियों में से एक था। मैं भारतीय सेना का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ। उन्होंने हमारी मदद की और ऐसी गंभीर स्थिति से हमें बचाया।”

वहीं एक यात्री आर्यन अहमद ने The Darjeeling chronicle को बताया, “हमें सुरक्षित रखने के लिए सैनिकों ने अपने स्लीपिंग बैग और बिस्तर हम लोगों को दे दिया और खुद -9 डिग्री की हड्डी गला देने वाली ठंड में बाहर खड़े रहे। उन्होंने हमारे लिए जो भी किया उसके लिए शब्द नहीं हैं। मैं पूरे देश को बताना चाहता हूँ कि मैं उनका बहुत आभारी हूं कि उन्होंने हमारी जान बचाई।”

इसके अलावा तमाम अलग-अलग जगहों से भारतीय सेना को दुआएँ और शाबाशी मिल रही है। कुछ लोगों ने उन्हें उनके परिवार से सुरक्षित मिलाने के लिए ढेर सारी दुआएँ और शुभकामनाएँ दी हैं। सच में, -9 डिग्री तापमान पर जब एक परिंदा तक अपना घोंसला छोड़कर बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझता, ऐसे माहौल में भारतीय सेना ने जो किया वो काबिल-ए-तारीफ है। पूरा देश उनका शुक्रिया अदा कर रहा है।

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