सरदार वल्लभभाई पटेल, आमतौर पर हम उन्हें सरदार पटेल के उपनाम से जानते हैं। लेकिन क्या आपने कभी इस बारे में सोचा है कि पाट्टीदार जाति में जन्म लेने वाले वल्लभभाई पटेल को आखिर “सरदार पटेल” क्यों कहा जाने लगा? किसने दी थी वल्लभभाई पटेल को सरदार की उपाधि? और इसके पीछे क्या वजह रही?

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दरअसल, वल्लभभाई पटेल के सरदार बनने की कहानी 1928 के बारडोली सत्याग्रह से जुड़ी है। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वर्ष 1928 में गुजरात में बारडोली सत्याग्रह हुआ, यह एक प्रमुख किसान आंदोलन था और इसका नेतृत्व वल्लभभाई पटेल कर रहे थे। उस दौरान प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में करीब 30 प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी थी। लगान वृद्धि के इस बोझ ने किसानों की कमर तोड़ी दी।

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वल्लभभाई पटेल ने सरकार के इस फैसले का पुरज़ोर विरोध किया और लगान वृद्धि के खिलाफ एक जंग छेड़ दी। इस आंदोलन में वल्लभभाई के साथ किसान कदम से कदम मिलाकर चल रहे थे। उधर सरकार भी इस आंदोलन को कुचलकर दरकिनार करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही थी।

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लेकिन वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में किसानों ने हार नही मानी और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखा। अंततः सरकार ने इस आंदोलने के आगे घुटने टेक दिए और किसानों की बात मान ली।

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उसके बाद न्यायिक अधिकारी बूमफील्ड और एक राजस्व अधिकारी मैक्सवेल ने इस पूरे मामले की जांच की और 22 प्रतिशत लगान वृद्धि को गलत ठहराते हुए इसे घटाकर 6.03 प्रतिशत कर दिया। यही नहीं आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए किसानों को भी सरकार ने छोड़ दिया।

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बारडोली सत्याग्रह आंदोलन के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद वहां की महिलाओं और किसानो ने खुश होकर वल्लभभाई पटेल को सरदार कहकर संबोधित किया। बारडोली सत्याग्रह के संदर्भ में महात्मा गांधी ने कहा कि इस तरह का हर संघर्ष हमें स्वराज के और करीब पहुंचएगा। हम सबको स्वराज की मंज़िल तक पहुंचाने में यह संघर्ष स्वराज के लिए संघर्ष से कहीं ज्यादा सिद्ध होगा।

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सरदार वल्लभभाई पटेल कहते थे कि “मेरी एक ही इच्छा है कि भारत एक अच्छा उत्पादक हो और देश में कोई भूखा ना हो, अन्न के लिए आँसू बहाता हुआ न हो।”

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