एक ऐसे युग में जब महिलाओं को माध्यमिक नागरिकों का ही दर्ज़ा प्राप्त था और वह केवल अपने घरों तक ही सीमित थी, तब कुछ ऐसी भी महिलाएं थी जिन्होंने घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर साहस और आत्म-विश्वास का परिचय दिया.

भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन की एक प्रख्यात हस्ती मैडम भीकाजी कामा (Madam Bhikaji Cama) की कहानी बहुत ही प्रेरणादायक है क्योंकि यह एक महिला के बल और धीरज की कसौटी है.

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यह भारत को आज़ाद घोषित किए जाने से चार दशक पहले 1907 का समय था. एक निडर महिला जिसके दिल में देशभक्ति की आग जल रही थी, वह जर्मनी के स्टटगेर्ट (Stuttgart) में समाजवादी कांग्रेस के समक्ष खड़ी हो गई थी और “भारत की आज़ादी का ध्वज” लहराया था. हरे, भगवे और लाल पट्टियों वाले उस तिरंगे को मैडम कामा और श्यामजी कृष्ण वर्मा ने साथ मिलकर डिज़ाइन किया था और बाद में इस ध्वज के नमूने को वर्तमान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज बनाने के लिए इस्तेमाल किया गया था.

Credit: Facebook | Parsi Zoroastrian Anjuman of Secunderabad and Hyderabad

मैडम कामा ने अगस्त 22, 1907 को ध्वज लहराया था और ऐसा करके वह अंतर्राष्ट्रीय धरती पर राष्ट्रीय ध्वज का प्रदर्शन करने वाली पहली महिला बन गई थी. सम्मलेन में सभी प्रतिनिधियों ने खड़े होकर राष्ट्रीय ध्वज को सलाम किया क्योंकि मैडम कामा ने ब्रिटिश राज के तहत गरीबी, भुखमरी और उत्पीडन पर प्रकाश डाला और उनसे मानव अधिकार, समानता और स्वायतत्ता की अपील की. हालांकि अधिकाँश भारतीय देश में रहकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे, वहीं वह देश के बाहर रहकर ऐसा करने वाले कुछ गिने-चुने लोगों में से एक थी. उन्होंने भारत की आज़ादी को बढ़ावा देने के लिए बहुत सी जगहों की यात्रा की थी.

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भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक अदम्य शक्ति होने के अलावा, मैडम कामा को उनकी परोपकारी गतिविधियों के लिए और महिला अधिकारों के एक वकील के रूप में भी मान्यता प्राप्त है. 1896 में बॉम्बे फेमिन और प्लेग ने उन्हें इतना अधिक प्रभावित किया कि उन्होंने अपने आप को लोगों की सेवा के लिए समर्पित कर दिया. वह स्वयं भी इसकी शिकार बन गई थी लेकिन सौभाग्यवश वह बच गई. उन्हें आराम और स्वस्थ होने के लिए यूरोप जाने की सलाह दी गई और 1902 में वह लंदन चली गई जहाँ उन्होंने अपने जीवन के बाकी दिन बिताए. नवम्बर 1935 में 74 वर्षीय भीकाजी भारत लौट आईं और अगस्त 13, 1936  को उन्होंने आखिरी सांस ली और देश ने एक निडर नेता को सदा के लिए खो दिया.

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