हर इंसान अपने 60 वर्ष की उम्र के बाद अपने काम से छुट्टी पाना चाहता है। लेकिन एक ऐसी दादी हैं जो 80 वर्ष होने के बावजूद अपना रेस्टोरेंट चलाकर अपने पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। दादी अपने इस रेस्टोरेंट को अपने घर की रसोई से चलाती हैं, जहाँ बहुत से विदेशी पर्यटक उनकी रसोई में खाना खाने आते हैं। खाना खाने के साथ-साथ उनको भारतीय संस्कृति और घर के खाने का स्वाद भी मिलता है।

Credit: tripadvisor.in

किसी बूढ़े पीपल के पेड़ की तरह जो जड़ से छोर तक एकदम मजबूत है, जीवन के अनुभव से लबरेज, परिवार की समस्याओं को दूर करने हेतु 80 वर्षीय चंदा देवी अपना रेस्टोरेंट चलाती हैं जिसका नाम है “व्यास मील”। पर्यटकों का कहना है कि यहाँ अधिकतम 150 रूपए में आप पेट भर कर खाना खा सकते हैं जो पूरी तरह से शाकाहारी और स्वादिष्ट है।

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यह रेस्टोरेंट राजस्थान के जैसलमेर के व्यास पैरा में स्थित है। रेस्टोरेंट उनके घर के पहले तल्ले पर स्थित है। यह रेस्टोरेंट वे पिछले चालीस वर्षों से स्वयं जमीन पर बैठकर खाना पकाकर चला रही हैं। इनके इस रेस्टोरेंट में दूर देश से भारत घूमने आए पर्यटक खाना खाने आते हैं। कई पर्यटकों का कहना है कि वे आपके द्वारा दिए गए भोजन के ऑर्डर को मात्र 40 मिनट में आपके सामने परोस देती हैं। वे बेहद प्यार से अपने बच्चों की तरह पर्यटकों से बात करती हैं।

Trip advisor में छपी एक टिप्पणी में मुंबई के आशिष मलुष्ठे ने कहा, “आपको इस बेहतरीन अनुभव को छोड़ना नहीं चाहिए। वे बातूनी और प्यारी हैं। उनके द्वारा बनाया गया भोजन बहुत स्वादिष्ट होता है। आखिरकार, यह दादी के हाथ का खाना जो है।”

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भारतीय संस्कृति और भारतीय परिवार में “दादी” का एक महत्वपूर्ण स्थान है। जीवन के धूप-छाँव में तपकर सफेद किए सुनहरे बाल और जीवन के अनुभव से माथे पर आई झुर्रियों वाली ये दादी आपको बड़े प्यार से खाना भी खिलाती हैं और प्यार से बातें भी करती हैं। जिंदगी की शायद ही कोई समस्या हो जिसका समाधान इनके पास न हो और यही प्यार इनको पर्यटकों के बीच में लोकप्रिय कर रहा है।

Trip advisor की दूसरी टिप्पणी में जॉर्जिया में रहने वाले अभिषेक ने भी कुछ ऐसे ही विचार व्यक्त किए और कहा, “मैं और मेरी पत्नी उस जगह पर घूमने गए थे। कुछ ही लोगों को इस जगह के बारे में पता है लेकिन यहाँं का भोजन जैसलमेर में मिलने वाले भोजन से हजार गुणा अच्छा है। ऐसा स्वादिष्ट और स्थानीय शाकाहारी भोजन आपको किसी रेस्टोरेंट में नहीं मिलेगा।”

विदेशी पर्यटक जो वहाँ घूमने गए हैं और उनके हाथ का बना स्वादिष्ट खाना खाया है, उनका भी अनुभव इस दादी के साथ कुछ ऐसा ही रहा है। वे भी दादी के इस प्यार और भोजन की स्वादिष्टता से अभिभूत हो चुके हैं। नीचे एक पर्यटक ने अपने विचार व्यक्त किए हैं इसे पढ़ें:

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चंदा देवी अपने इस रेस्टोरेंट की कमाई से अपने घर का खर्चा चलाती हैं। अभी तक उन्होंने इस कमाई से दो बेटियों की शादी की और घर की अन्य जरूरतें भी पूरी की हैं।

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