पूर्व समुद्री कमांडों प्रवीण तेवतिया (33 वर्षीय) भारत के पहले दिव्यांग आयरनमैन बन गए हैं। हाल ही में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में आयरनमैन ट्रायथलॉन चैम्पियनशिप 2018 की दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का खिताब जीता है। 

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साल 2008 में मुंबई में हुए ताज हमले में आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान प्रवीण को चार गोलियां लगी थीं। उन्हें गोलियां उनके फेफड़ों और कान में लगी थीं, जिसके चलते उनके सुनने की क्षमता चली गयी। इसके बाद उन्हें सर्विस में नॉन-एक्टिव ड्यूटी दी गयी,लेकिन तेवतिया इस से संतुष्ट नहीं थे। उन्होंने स्वयं को ड्यूटी के लिए पूरी तरह से फिट बनाने का फैसला किया, इसीलिए उन्होंने मैराथन में भाग लेना शुरू किया।

यूपी के बुलंदशहर से संबंध रखने वाले तेवतिया ने बताया, “मैं स्वयं को और नेवी को यह साबित करना चाहता था कि मैं न केवल अपने हौसलों से, बल्कि शारीरिक रूप से भी ड्यूटी के लिए फिट हूँ। आज तक भारत में किसी भी नेवी सैनिक ने आयरनमैन का ख़िताब नहीं जीता है।”

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आयरनमैन ट्रायथलॉन में 180.2 किलोमीटर तक साइकिल चलानी होती है। 110 कि.मी. के लिए साइकिल चलाने के बाद, तेवतिया की साइकिल का डरेलर (derailleur) टूट गया और वे सड़क पर गिर गये। इस दुर्घटना में उनके घुटने व टखने में चोट आयी; लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। कुछ दूरी पर ही साइकिल की मरम्मत करने वाली टीम का टैंट था, जिन्होंने उनकी साइकिल को 35 मिनट में ठीक कर दिया।

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अब अगले साल फरवरी में अमेरिका के अल्ट्रामन ख़िताब को जीतना उनका लक्ष्य है। हम प्रवीण को उनकी जीत के लिए बधाई देते हैं और उम्मीद करते हैं कि और भी लोग उनसे प्रेरणा लेंगें।

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