“सच है, विपत्ति जब आती है,
कायर को ही दहलाती है,
सूरमा नहीं विचलित होते,
क्षण एक नहीं धीरज खोते,
विघ्नों को गले लगाते हैं,
काँटों में राह बनाते हैं।”

कवि रामधारी सिंह दिनकर द्वारा लिखी गई यह कविता उन बच्चों पर सटिक बैठती है जिन्हें हाल ही में वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया है। तीन बच्चों को यह पुरस्कार मरणोंपरांत दिया जाएगा। काश की ये तीन बच्चे भी आज हमारे बीच होते तो इस खुशी में चार चाँद लग जाते। हम उन सभी बहादुर बच्चों को सलाम करते हैं जिन्होंने दुनिया के सामने एक मिसाल कायम की है। सच ही कहते हैं कि बहादुरी का उम्र कोई लेना-देना नहीं होता। चलिए एक बार रूबरू होते हैं उन बहादुर बच्चों से।

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Credit: AbTakNews

हर साल पूरे देश से कुछ ऐसे बच्चों को उनकी वीरता के लिए सम्मानित किया जाता है जो अपनी जान की फिक्र किए बिना ही दूसरों के जीवन की रक्षा करते हैं। इस वर्ष सम्मान पाने वाले बच्चों में सात लड़कियाँ शामिल हैं। सभी बच्चे 26 जनवरी पर होने वाली परेड में शामिल होंगे और राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। और फिर प्रधानमंत्री उन बच्चों को सम्मानित करेंगे।

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Credit: ABP News

यह अवॉर्ड कुल पाँच श्रेणियों में दिए जाते हैं: पहला भारत अवॉर्ड (Bharat Award), दूसरा है संजय चोपड़ा अवॉर्ड (Sanjay Chopra Award), तीसरा है गीता चोपड़ा अवॉर्ड (Geeta Chopra Award), चौथा है बापू गायधनी अवार्ड (Bapu Gaidhani Award) और पाँचवा है जनरल राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार (General National Bravery Awards)।

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इस बार “भारत अवॉर्ड” आगरा की 16 साल की बहादुर बेटी नाजिया को दिया जाएगा। इन्होंने अकेले दम पर अपने क्षेत्र के जुआ और ड्रग माफिया को उखाड़ फेंका। संजय चोपड़ा अवॉर्ड से अमृतसर के 16 साल के छात्र करनबीर सिंह को सम्मानित किया जाएगा। एक हादसे में जब इनके स्कूल की गाड़ी जब नाले में गिर गई तो इन्होंने बहादुरी का परिचय देते हुए 15 बच्चों की जान बचाई। वहीं कर्नाटक की नेत्रावती एम चव्हाण 30 फीट गहरे कुएँ में डूब रहे दो बच्चों को तो बचाने में सफल हो गईं लेकिन इस दौरान इन्हें अपनी जान गवानी पड़ी।

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इसके अलावे बापू गायधनी अवार्ड से ममता दलाई को सम्मानित किया जाएगा जो अपनी बहन की जान बचाने के लिए मगरमच्छ से लड़ गईं। इसके आलावा मेघालय के लोकरकपाम राजेश्वरी चनु (मरणोपरांत), ललछंदमा (मरणोपरांत), बेटश्वाजॉन (14 वर्ष), समृद्धि शर्मा (16 वर्ष), लक्ष्मी यादव (16 वर्ष), पंकज सेमवाल (16 वर्ष), मनशा (13 वर्ष), जोनुन्तुलंगा, (16 वर्ष), एजाज अब्दुल रउफ (17 वर्ष), चिंगई वांग्सा, शेंगपॉन, योकनेई और पंकज कुमार महंत को उनके अदम्य साहस के लिए सम्मानित किया जाएगा। साथ ही इनकी शिक्षा का खर्च इंडियन काउंसिल फॉर चाइल्ड वेलफेयर वहन करेगी।

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