अक्सर जब भी आप किसी व्यस्त बाजार में घूम रहे होंगे तो पुलिस के द्वारा किसी दुकानदार को परेशान करना या उससे पैसे लेते देखना आपके  लिए एक आम दृश्य होगा, जिसके कारण आपके मन में पुलिस की एक नकारात्मक छवि बनना वाजिब है। लेकिन सारा पुलिस महकमा ऐसा हो, यह संभव तो नहीं। आज हम आपको एक ऐसी ही कहानी बताने जा रहे हैं जिसे पढ़ने के बाद पुलिस महकमे पर से उठ रहा आपका विश्वास फिर से स्थापित हो जाएगा।

द लल्नटाप की एक वीडियो के अनुसार, कहानी है पश्चिमी यूपी के अमरोहा जिले की, जहाँ बीते दिनों जोर-शोर से दिवाली की तैयारियां चल रही थीं। एक बाजार जो रंग-बिरंगी लाइटें और विभिन्न प्रकार की चीजों से पूरी तरह सजा हुआ था, वहीं एक कोने में दो बच्चे मिट्टी के दीए सजाकर बैठे थे ताकि लोग आएँ, उनके दीए खरीदें और उससे होने वाले फायदे से वे भी दिवाली मना सकें।

लेकिन रंग-बिरंगी लाइट से सजी इस बाजार से नजर हटाकर कौन उस मिट्टी के दीए की ओर नजर डाले और उसे खरीदे। तभी उस क्षेत्र के थाना अध्यक्ष नीरज कुमार अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे और सड़क पर खड़े दुकानदारों को लाइन से दुकान लगाने को कहा ताकि आने-जाने वाले लोगों को कोई समस्या न हो और ट्रैफिक न लगे।

उन दोनों बच्चों ने भी उनकी आज्ञा का पालन किया और दुकान को एक ओर खिसकाने लगे। इतने में पुलिस दस्ता वहां पहुंचा। दीए न बिकने के कारण पहले से ही बच्चे हतोत्साहित थे, पुलिस दस्ते को देखकर वे और हताश हो गए और दस्ते से कहा कि जैसे ही दीए बिक जाएंगे वे वहां से हट जाएंगे।

थाना अध्यक्ष नीरज कुमार ने उनसे बात करनी शुरू की। तो बच्चों ने बताया कि कोई दीए खरीद ही नहीं रहा है। नीरज कुमार ने इंसानियत दिखाते हुए पहले तो बच्चों से दीए खरीदे। उनको दीए खरीदते देख साथ के पुलिस वाले भी दीए खरीदने लगे, लेकिन दीए बहुत ज्यादा थे।फिर वो हुआ जिसकी शायद उस वक्त कल्पना करना भी मुश्किल था। अब नीरज कुमार खरीददार से दुकानदार बन गए और लोगों से दीए खरीदने की अपील करने लगे। इस प्रकार पुलिस को देख लोगों की वहाँ भीड़-सी जमा हो गई और देखते ही देखते सारे दीए बिक गए।

सारे दीए बिक जाने के बाद नीरज कुमार ने कुछ पैसे और मिलाकर उन बच्चों को सारे पैसे दे दिए तथा उनके साथी पुलिस वालों ने भी बच्चों को तोहफे  दिये और उन बच्चों की दिवाली खुशियों से भर दी। आज के युग में पुलिस के ऐसे दस्ते शायद ही देखने को मिलते हैं। एक ऐसा दस्ता जो खुद तो दिवाली मनाने घर नहीं जा पाया, क्योंकि उन्हें दिवाली के दिन व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्यूटी करनी थी लेकिन उन बच्चों की दिवाली उन्होंने जरूर रंगीन कर दी।

Share

वीडियो

Ad will display in 09 seconds