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7 गुमनाम स्वतंत्रता सेनानी जो भारत के इतिहास में बेजोड़ योगदान देने के बावजूद कहीं खोकर रह गए हैं!

हमारे जाने-पहचाने स्वतंत्रता सेनानियों के अलावा ऐसे बहुत से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे हैं जिनके नाम इतिहास की किताबों के पन्नों से गायब हैं या इनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। उन्होंने कभी इस बात की चिंता नहीं की कि वे प्रसिद्ध हुए या गुमनाम बने रहे क्योंकि उन सभी का उद्देश्य देश को आजादी दिलाना था। इस देश के नागरिक होने के कारण हमारा यह कर्तव्य हो जाता है कि हम उन स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में भी जानें जो कि गुमनामी में रहते हुए देश सेवा का अपना काम करते रहे।

तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही स्वतंत्रता सेनानियों और उनके संघर्ष और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण के बारे में:

1. श्यामलाल गुप्त पार्षद!

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Credit: Khabar Live [1]

उत्तर प्रदेश में कानपुर जिले में जन्में श्यामलाल गुप्त पार्षद हिंदुस्तान के स्वतंत्रता संग्राम के समर्पित सेनानियों में एक हैं। श्यामलाल गुप्त आठ बार में कुल छ: वर्षों तक राजनीतिक बन्दी रहे। उन्होने “नमक आन्दोलन” तथा “भारत छोड़ो आन्दोलन” का प्रमुख संचालन किया तथा लगभग 19 वर्षों तक फतेहपुर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद के दायित्व का निर्वाह भी किया। राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत सुप्रसिद्ध गीत “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा” पार्षद जी की ही रचना है।

2. भीखाजी कामा!

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Credit: Firstpost [2]

मुंबई में एक पारसी परिवार में जन्मीं श्रीमती भीखाजी जी रूस्तम कामा (मैडम कामा) का पेरिस से प्रकाशित “वन्देमातरम्” पत्र प्रवासी भारतीयों में काफी लोकप्रिय हुआ। उन्होंने लन्दन, अमेरिका और जर्मनी का भ्रमण कर भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में माहौल बनाया। उन्होंने कहा-‘‘आगे बढ़ो, हम हिन्दुस्तानी हैं और हिन्दुस्तान हिन्दुस्तानियों का है।’’ यही नहीं मैडम भीखाजी कामा ने कांफ्रेंस में “वन्देमातरम्” अंकित भारतीय ध्वज फहरा कर अंग्रेजों के सामने चुनौती पेश की।

3. मदनलाल धींगड़ा!

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Credit: Jansandesh [3]

पंजाब प्रान्त के एक सम्पन्न हिन्दू परिवार में जन्मे मदनलाल धींगड़ा ने परिवार की इच्छा के विरूद्ध जाकर स्वतंत्रता संग्राम में अपना बलिदान दिया। उन्होंने विलियम हट कर्जन वायली नामक एक ब्रिटिश अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी जिसके लिए ब्रिटिश अदालत ने उन्हें मृत्युदण्ड की सजा दी और अगस्त 17, 1909 को लन्दन की पेंटविले जेल में फाँसी के फन्दे पर लटका दिया।

4. विनायक दामोदर सावरकर!

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Credit: Viral News [4]

विनायक दामोदर सावरकर प्रखर राष्ट्रवादी नेता और भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के नायक थे। उन्हें महान क्रान्तिकारी, सिद्धहस्त लेखक, चिन्तक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता के रूप में जाना जाता है। वे गांधी जी की अहिंसा की नीति में विश्वास नही रखते थे। उनकी मत थी कि कोई ऐसी सेना होनी चाहिए जो अंग्रजों के साम्राज्य को उखाड़ फेंके। नासिक षडयंत्र काण्ड के लिए वीर सावरकर जी को काला पानी की सजा पर सेलुलर जेल भेजा गया।

5. उधम सिंह!

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Credit: deshbandhu [5]

उधम सिंह का जन्म दिसम्बर 26,1899 को पंजाब के संगरूर जिले में हुआ था। उन्होंने जलियांवाला बाग कांड के समय पंजाब के गर्वनर जनरल रहे  माइकल ओ’ ड्वायर को लन्दन में जाकर गोली मारी थी। जिसके लिए जून 4, 1940 को उधम सिंह को हत्या का दोषी ठहराया गया और जुलाई 31, 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई।

6. कनकलता बरूआ!

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Credit: osmeb [6]

असम में जन्मीं कनकलता बरूआ भारत की एक साहसी वीरांगना थीं। सितंबर 20, 1942 में एक गुप्त सभा में तेजपुर की कचहरी पर तिरंगा झंडा फहराने का निर्णय लिया गया था जिसमें कनकलता एक दल का नेतृत्व कर रहीं थीं। तिरंगा फहराने आई हुई भीड़ पर गोलियाँ दागी गईं और यहीं पर कनकलता बरुआ ने शहादत पाई।

7. जतींद्र नाथ मुखर्जी!

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Credit: Lokmatnews [7]

जतींद्र नाथ मुखर्जी अत्यन्त साहसी क्रांतिकारी थे। युवावस्था में उनकी मुठभेड़ एक बाघ से हो गयी। जिसके बाद वे बाघा जतीन” नाम से विख्यात हो गए थे।  “हावड़ा षडयंत्र केस” में गिरफ्तार होने के बाद उन्हें साल भर जेल में रहना पड़ा। जेल से मुक्त होने पर वे “अनुशीलन समिति” के सक्रिय सदस्य बन गए और “युगान्तर” का कार्य संभालने लगे। वे युगान्तर पार्टी के मुख्य नेता थे। 35 वर्ष की आयु में हुई गोलीबारी की घटना में उनकी मृत्यु हो गई।