वे लोग जो बहुत जुनूनी और जरुरत के मुताबिक हिम्मत रखते हैं वे हमेशा अपनी सीमाओं से आगे बढ़ने का प्रबंध कर लेते हैं और अन्य लोगों के जीवन में भी बदलाव लाते हैं। इस युवा भारतीय महिला की तरह, जो 20 सालों से भी अधिक समय से आवारा पशुओं के लिए निःस्वार्थ काम कर रही हैं।

शालिनी अग्रवाल (Shalini Agarwal), जानवरों की देखरेख करने वाली और 46 जानवरों की पालक हैं, जिन्हें उन्होंने उत्तर भारत के बरेली के अपने दो बेडरुम वाले अपार्टमेंट में रखा है। 36 साल की ये महिला हमेशा से ही जानवरों से प्यार करती रही हैं, और इन्होंने अपना जीवन ज़रुरतमंद जानवरों के नाम समर्पित कर दिया है। अपने पति और दो बेटियों के साथ, शालिनी, कुत्ते, बिल्लियों, चिड़ियों, एक तीन महीने के बछड़े, इसके अलावा एक बंदर के साथ अपना घर साझा करती हैं।

Credit: Facebook/Mercy for All

20 सालों से शालिनी जानवरों की देखरेख कर रही हैं—एक जुनून जो उन्हें उनके पिता से विरासत में मिला। समय-समय पर, वह सड़क पर घायल जानवरों की खोज करती हैं। कई बार जो लोग इनके बारे में जानते हैं, जब उन्हें किसी ज़रुरतमंद जानवरों के बारे में पता चलता है, तो वे शालिनी से संपर्क करते हैं। शालिनी जानवरों के प्रताड़ना की तमाम मामलों से भी अवगत हुई हैं। आवश्यकता पड़ने पर, वह चिकित्सकीय देखरेख भी उपलब्ध कराती हैं या फिर उस जानवर को पशु चिकित्सक के पास ले जाती हैं।

दो दशकों से शालिनी जानवरों की देखरेख कर रही हैं।

Credit: Facebook/Shalini Agarwal Arora

दी बेटर इंडिया के एक रिपोर्ट के अनुसार, शालिनी ने कहा कि, “मेरे पिता जानवरों से बहुत प्रेम करते थे और मैं उनका प्यार बचपन से देखती आ रही हूं। काम के सिलसिले में यात्रा करते हुए या फिर किसी सड़क यात्राओं के दौरान, जब कभी भी वे सड़क किनारे किसी घायल जानवर को देखते थे, वे उसे घर ले आते। जानवरों के लिए मेरा काम मेरी आदतों में शुमार हो गया है, जिसे मैने उन्हें सालों से देखते हुए सीखा है।”

शालिनी के कुछ जानवर बाहर घूमना पसंद करते हैं, लेकिन सामन्य तौर पर वे शाम को वापस उनके अपार्टमेंट में आ जाते हैं।

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Credit: Facebook/Shalini Agarwal Arora

आखिरकार, शालिनी ने मर्सी फॉर ऑल (Mercy For All) की स्थापना की, एक निर्लाभ संस्थान, जो कि जानवरों के बचाव कार्य, जानवरों के प्रति हो रहे अत्याचारों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने, और ज़रुरतमंद जानवरों के लाभ के लिए पशुचिकित्सकों की मदद करता है। उनकी पहल को अधिकारियों ने वैध मान्यता भी दे दी है।

एक घटना में, शालिनी ने संक्रमित घाव वाले एक सांढ़ को देखा, उसे उपचार के लिए ले जाने से पहले उन्हें उसे बस में करने के लिए 16  मजदूरों को रखना पड़ा।

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Credit: Facebook/Shalini Agarwal Arora

उन्होंने कहा कि, “जब मैने शुरुआत की, तो मेरे पास इन जानवरों को रखने के लिए जगह नहीं थी।”

मुझे बड़े जानवरों को नगरपालिका आश्रय घर में रखना पड़ा या फिर उन्हें किसी को गोद देना पड़ा। लेकिन छोटे जानवरों की स्थिति में, किसी अन्य आश्रयघर में जाना और देखरेख करना मुश्किल था—उन्हें बस चिकित्सकीय सहायता की जरुरत होती है, किसी को सर्जरी की भी आवश्यकता होती है। इसलिए, उनके उचित देखरेख के प्रति आश्वस्त होने के लिए मैं उन्हें घर लेकर आती हूं। और धीरे-धीरे, एक-एक को रखते-रखते, वे बहुत ज्यादा हो गए।

जानवरों के आश्रय के लिए शालिनी फिलहाल धन एकत्रित करने के लिए एक पेज शुरु किया है।

Credit: Facebook/Mercy for All

शालिनी ने कहा कि, “हर किसी के लिए कोई होना चाहिए, और मुझे लगता है कि यहां मैं इन जानवरों के लिए हूं। कई दोस्तों और रिश्तेदारों ने मेरे पास आना बंद कर दिया क्योंकि वे जानवरों के आस-पास खुद को सहज नहीं पाते हैं, लेकिन मेरे परिवार ने हर कदम पर मेरा साथ दिया। जो कि मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।”

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