लोगों के मनोरंजन का साधन बने टीवी सीरियल्स इन दिनों उन्हीं के अंदाज़ में बोलते नज़र आ रहे हैं। अब बात चाहे एण्ड टीवी के “भाभाजी घर पर हैं” की हो या कलर्स का “ना आना इस देश लाडो,” इन सभी टीवी सिरियल्स में क्षेत्रिय भाषाओं का भरपूर इस्तेमाल किया गया है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि इसकी शुरुआत किस टीवी सीरियल से हुई थी?

आज हम इस लेख में छोटे पर्दे के कुछ ऐसी ही धारावाहिकों के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिनकी बोली बदल गई है और उन्होंने अंदाज़-ए-देशी अपना लिया है।

1. धारावाहिकों की बदली बोली!

कहते हैं बदलाव प्रकृति का नियम है और ये बदलाव टीवी सीरियल में पूरज़ोर के साथ देखने को मिल रहा है। किसी ज़माने में धारावाहिकों का पैमाना ज्यादातर शुद्ध हिन्दी या फिर आम बोल चाल वाली हिन्दी हुआ करती थी। लेकिन आज के इस दौर में टीवी सीरियल्स भी क्षेत्रिय बोली बोलने लगे हैं।

2. कब से बदली बोली!

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Credit: Facebook (Metronome)

हालांकि, टीवी की इस बदलती बोली की शुरुआत कब और किस धारावाहिक से हुई, इसके बारे में ठीक-ठीक तो कुछ नहीं कहा जा सकता है। लेकिन कहा जाता है कि एकता कपूर के प्रसिद्ध टीवी सीरियल “सास भी कभी बहु थी” से इसका ट्रेंड शुरु हुआ।

3. कलर्स रहा इस मामले में आगे!

हालांकि, क्षेत्रिय भाषाओं वाले टीवी सीरियल्स के मामले में कलर्स टीवी सबसे आगे रहा है। बालिका वधू, ना आना इस देश लाडो, उतरन जैसी धारावाहिकों में ठेठ क्षेत्रिय भाषाओं का समिश्रण था।

4. रियल टच देने के लिए किया गया ऐसा!

इसके अलावा ज़ी टीवी पर भी कुछ धारावाहिक आते थे जिनके किरदार क्षेत्रिय बोली में बोलते नज़र आते थे। सीरियल को रियल टच देने के लिए क्षेत्रिय अद्घोषों का भी खूब इस्तेमाल हुआ है।

5. आजकल क्षेत्रिय बोली का ट्रेंड है!

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बात यदि आज के ज़माने की करें, तो एण्ड टीवी के धारावाहिक भाभी जी  घर पर हैं में ठेठ कानपुरिया बोली का इस्तेमाल किया गया है जो कि दर्शकों को खूब रास आ रही है। इसके अलावा सब टीवी के एफआईआर के किरदारों की हरियाणवी बोली भी लोग खूब पसंद करते हैं।

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