…वो अप्रैल 1984 का दौर था जब कांशीराम ने बीएसपी की नींव रखी और “चंद्रावती देवी” नाम की वो दलित लड़की शिक्षण का कार्य छोड़कर बीएसपी में शामिल हुई। वही चंद्रावती जो 21 साल की उम्र में दिल्ली के एक आयोजन में मंच पर चढ़ी और उस वक्त के दिग्गज नेताओं की धज्जियां उड़ाकर नीचे उतरी। एक ऐसी लड़की जो लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव हारी, लेकिन बावजूद इसके, अपने पथ से नहीं डिगी। कहानी एक ऐसी लड़की की जो आगे चलकर देश के सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी और “मायावती” के रुप में देश की सबसे बड़ी दलित नेता बनी। 

1. एक छोटे से मकान में रहता था पूरा कुनबा!

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“बहन जी” के नाम से मशहूर मायावती का जन्म जनवरी 15, 1956 को दिल्ली के लेडी हार्डिंस अस्पताल में हुआ था। उनके पिता “प्रभु दास” पोस्ट ऑफिस में क्लर्क और मां “रामरती” गृहणी थीं। मायावती के छह भाई और दो बहनें हैं। उस वक्त दिल्ली के इंद्रपुरी इलाके के एक मकान में पूरा कुनबा रहता था।

2. इंद्रपुरी की गलियों में बीता बचपन!

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मायवती का बचपन इंद्रपुरी के इन्हीं गलियों में खेलते-कूदते व्यतीत हुआ। हालांकि उनकी मां भले ही पढ़ी लिखी नहीं थी, लेकिन वे अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना चाहती थी। मायावती की प्रारंभिक शिक्षा भी इंद्रापुरी इलाके के एक विद्यालय में पूरी हुई।

3. कलेक्टर बनने का था सपना!

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बचपन से ही मायावती का सपना कलेक्टर बनने का था और इसके लिए उन्होंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश भी की। बीएड की पढ़ाई पूरी करने के बाद मायावती प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने लगी।

4. शिक्षिका के तौर पर किया काम!

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1977 में परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहा था, परिवार को इस परेशानी से उबारने के लिए मायावती ने एक शिक्षिका के तौर पर काम करना शुरु कर दिया। वो दिन में बच्चों को शिक्षित करती और रात को स्वअध्याय।

5. 1977 में मिली नई दिशा!

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1977 जहां मायावती के जीवन में परेशानियां लेकर आया था, तो वहीं दूसरी ओर नियति इनके जीवन को एक नई दिशा देने की तैयारी में थी। इस साल मायावती कांशीराम के संपर्क में आईं और उन्होंने मायावती को राजनैतिक नाव पर सवार होने की सलाह दी।

6. शुरु हुआ मायावती बनने का सफर!

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1984 में जब कांशीराम ने बीएसपी की स्थापना की तो मायावती शिक्षण का कार्य छोड़कर बीएसपी में शामिल हो गई। कहते हैं कि कांशीराम ने ही मायावती को चंद्रावती देवी से मायावती का नाम दिया। और फिर शुरु हुआ चंद्रावती देवी के मायावती और फिर बहनजी बनने का सफर।

7. पहली बार में ही लहराया विजय पताका!

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कांशीराम के मार्गदर्शन में साल 1989 में मायावती बिजनौर विधानसभा सीट से पहली बार राजनीतिक पथ पर उतरी और विजय पताका फहराते हुए आगे निकल गई।

8. पहली बार बनी मुख्यमंत्री!

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सन 1995 में मायावती के किस्मत ने जबरदस्त करवट ली और इसी साल जून 3 को मायावती देश के सबसे  बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी। हालांकि, उस वक्त सूबे में उनका कार्यकाल मात्र पांच महीनों तक ही रहा। लेकिन दो साल बाद फिर मार्च 21, 1997 को मायावती ने वापसी की और मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुई। हालांकि उनका ये कार्यकाल भी मात्र कुछ महीनों का रहा।

9. पांच सालों का कार्यकाल पूरा किया!

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इसके बाद मायावती साल 2002 से 2003 तक मुख्यमंत्री रही। लेकिन मई 13, 2007 में जब वो सत्ता में आई तो इस बार पांच सालों का कार्यकाल पूरा करने के बाद ही कुर्सी से उतरीं। साल 2012 में हुए विधानसभा चुनाव में मायावती समाजवादी पार्टी से हार गई। और सूबे की कमान उनके हाथों से छिनकर अखिलेश यादव के हाथों में चली गई।

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