एक दौर था जब न्यूज़ चैनल्स पर केवल ख़बरें प्रसारित होती थी। लेकिन वक्त बदला और वक्त के साथ ख़बरों की दुनिया भी बदल गई। आज के दौर में खबरे मनोरंजन का साधन मात्र बनकर रह गयी हैं। हर घंटे न्यूज़ चैनल्स पर एक नयी ब्रेकिंग न्यूज़ चलने लगती है और हर शाम डिबेट के लिए स्टूडियो में मेहमानों की भीड़। इन सभी बदलावों को देखकर ऐसा लगता है जैसे भारतीय मीडिया अपने रास्ते से भटक गई हो। एक दौर वो भी था जब लोग परिवार के साथ बैठकर समाचार देखा करते थे। हर उम्र के लोग दूरदर्शन (DD NATIONAL) पर प्रसारित होने वाला समाचार बुलेटिन देखा करते थे। आज के न्यूज़ रीडर्स से अलग उस दौर के न्यूज़ रीडर्स शांति और विराम के साथ समाचार पढ़ा करते थे। 

यहां हम आपको बीते दौर के कुछ ऐसे ही बेहतरीन समाचार प्रस्तुतकर्ताओं (News Presenters) से मिलाने जा रहे हैं। जो कभी आपके भी चहेते रहे हैं।

शोभना जगदीश

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शोभना जगदीश उस दौर में दूरदर्शन का एक जाना-माना चेहरा हुआ करती थी। शोभना के समाचार पढ़ने का तरीका भी औरों से बिल्कुल अलग था।

शम्मी नारंग

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80 और 90 के दशक में नारंग सबसे सक्रिय समाचार प्रस्तुतकर्ता में से एक रहें। दिल्ली मेट्रो में भी नारंग की आवज़ गूंजती है। इन दिनों नारंग वॉइस ओवर और पत्रकारिता के छात्रों को ट्रेनिंग देते हैं।

नीती रविंद्रन

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अपने समाचार बुलेटिन के माध्यम से उन दिनों हर शाम नीती भारत के हर घर की सदस्य हुआ करती थी। अपने ऑनस्क्रिन करियर के बाद नीती ने एक वॉइस ओवर आर्टिस्ट के तौर काम किया और कई शॉर्ट फिल्मों और डॉक्यूमेंट्रियों के लिए काम किया। 1997 में मदर टेरेसा की मौत की खबर ब्रेक करने वाली भी नीती ही थी।

सरला महेश्वरी

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महेश्वरी से बेहतर शायद ही कोई और समाचार प्रस्तुतकर्ता हो जो दर्शकों को रोक सकता हो। सरला अपने शांत स्वभाव और बेहतरीन आवाज़ के लिए जानी जाती थी।

प्रतिमा पुरी

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दूरदर्शन ने जब पहली बार पांच मिनट के न्यूज़ बुलेटिन की शुरुआत की थी, तब सबसे पहला बुलेटिन प्रतिमा पुरी ने ही प्रस्तुत किया था। सन 1965 में प्रतिमा ने दूरदर्शन के साथ अपने करियर की शुरुआत की थी। अंतरिक्ष में पहुंचने वाले सबसे पहले व्यक्ति यूरी गगारियान का इंटर्व्यू भी पुरी ने ही लिया था।

वेद प्रकाश

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वेद प्रकाश दूरदर्शन के लिए एक नये न्यूज रीडर और वॉइस-ओवर आर्टिस्ट के तौर पर काम करने के लिए आए। वह ‘स्टूडेंट्स टुडे’ (Student Today)  के मुख्य संपादक (editor-in-chief) भी रहे और देश के जाने-माने अखबारों के लिए आर्टिकल भी लिखे।

सुनित टंडन

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सुनित टंडन उस दौर के अंग्रेजी न्यूज़ रीडर थे। वह दूरदर्शन से 2007 तक जुड़े रहे। टंडन इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ मास कम्यूनिकेशन के डायरेक्टर भी रह चुके हैं।

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